शिवलिंग ब्रह्माण्ड में स्थित जीवन का प्रतीक चिन्ह है ,| ब्रह्माण्ड दो शब्दों से मिलकर बना है , ब्रह्मा और अण्ड ,ब्रह्मा का आशय है ,जिससे विश्व की उत्पत्ति होती है , व अण्ड से आशय है ,जीवन | ब्रह्माण्ड की आकृति ठीक शिवलिंग है ,| ब्रह्माण्ड को मापा नहीं जा सकता ,क्यों कि विज्ञान अनुसार ये विस्तृत यानी बढ़ता ही जा रहा है |
शिवलिंग में शिवलिंग आधार, ब्रह्माण्ड है ,और ऊपर पिंड जीवन (आकाश गंगा ) है |
पिंड अंडाकार ही होना चाहिए लेकिन कई जगह शिवलिंग के आकर ,दिशा ,प्रतीक आदि में गलती होती है |
शिवलिंग में आधार ब्रह्माण्ड (universe )है | और अंडाकार पिंड आकाश गंगा (galaxy ) व जीवन (पृथ्वी ) है |
चुकि ब्रह्माण्ड विस्तृत अनंत है ,इसलिए इसे जल द्वारा इसे प्रगतिशील होना दर्शाया जाता है | भारत में कई शिवलिंग है ,जो निरंतर बढ़ते रहते है ,उनमे वाराणसी का तिलभांडेश्वर महादेव भी है |
१२ ज्योतिर्लिंग अलग अलग आकाश गंगा और अलग अलग पृथ्वी की ही परिकल्पना है |
अभी तक हम अपने आकाश गंगा (हमारी गैलेक्सी जिसका नाम मिल्की वे है ) को ही खोज नहीं सके है ,जिसमे हमारी पृथ्वी भी उपस्थित है |
ये सब ब्रह्माण्ड (universe or cosmos )की अनंतता ही दर्शाते है | शिवलिंग उत्तर मुखी होते है ,जो नार्थ पोल साउथ पोल मैग्नेटिक फिल्ड की संकल्पना पर आधारित है |
नासा जो आज खोज रहा है ,हमारा सनातन धर्म उसे बहुत पहले ही खोज चुका है ,चुंकि सबसे प्राचीन और प्रथम देव शिव है ,इसलिए हम इस प्रतीक चिन्ह को शिव को समर्पित कर पूजा करते है |
शिव को आदि अनंत माना गया है | ठीक ब्रह्माण्ड की तरह ,इनकी प्राचीनता के कारण हम बाबा कहते है ,और संसार के सभी जीवो को साथ लेकर चलने के कारण हम शिव कहते है |
शिव लय व प्रलय है ,अर्थात सृष्टि के उत्पत्ति और विनाश के कारक है | सृष्टि का सृजन और विनाश चलता रहता है ,एक न एक दिन धरती ,सूरज ,चाँद का भी अंत निश्चित है | शिव भी सदाशिव हो जाते है |
अतः जिसे हम शिवलिंग कहते है ,वो उनको प्रतीक मान कर ब्रह्माण्ड में स्थिति का प्रतीक चिन्ह है | अतः वो ईश्वर जो ब्रह्माण्ड (दुनिया) और जीवन है |
अन्य देवताओ का चित्र (मूर्ति) होता है ,लेकिन शिव की सर्वोचता व गुरु होने के कारण प्रतीक चिन्ह होता है |













