ऐसे में जरूरत है,इनमें आत्मविश्वास उत्पन्न करने की आत्मनिर्भर बनाने की तभी इन्हें आत्मगौरव प्राप्त होगा।
इन्हें सेवा ,सुरक्षा ,संस्कार दो , इन्हे आजीवन अग्निपरीक्षा देना है । बहुत दूषित सोच है,समाज में लड़कियों के लिए । इन्हें कमजोर जान कर ही , महिषासुर अपनी मृत्यु किसी स्त्री से हो ऐसा ब्रह्मा से वरदान मांगा ,नरकासुर ने भी यही वरदान मांगा था । आज के समय में रणधीर कपूर ,श्री देवी ,हेमा मालिनी आदि जिनके पास सिर्फ बेटिया है ,इन्हें स्वयं व अपने बेटियों पर गर्व है । आज भी अन्य चर्चित सफल महान लोगों की सिर्फ बेटियां है। जिसमें एक उस समय नेहरू जी भी थे।
कुछ हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार निसंतान और अविवाहित को मोक्ष या अन्य लोक का अधिकारी नहीं माना जाता है । जिनमें एक कथा जरत्कारु की आती है । हम विश्व महिला दिवस, मातृ दिवस (mother day) रक्षा बंधन तो मनाते है ,ईश्वर भी अर्ध नारीश्वर है । पर गेट के बाहर निकलते ही सब व्यर्थ ,पुरुष जाति को मन के अंदर और बाहर दोनों स्थिति में समान भाव की जरूरत है।
आज कोई भी फिल्ड नहीं जहां ये न हो ,अपने हक हिस्से व अत्याचारीयो के खिलाफ इन्हें झांसी की रानी बनाओ ।
आज ये किसी परिचय की मोहताज नहीं है । इन्होंने समाज के हर क्षेत्र से आदर्श स्थापित किया है ।
श्रम,शक्ति , सामर्थ्य के साथ महत्व ,महत्वपूर्णता और महत्वकांक्षा भी आती है ।
अतः अपने आप को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना सुदृढ़ कर लो कि समाज तुम्हारा कुछ न बिगाड़ सके ,इच्छा (ambition) रखो अपेक्षा (expectation) नहीं।
किसी ने कहा है ,
मंजिले उन्हीं को मिलती है,जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता,हौसलों से उड़ान होती है।।
लेखक: प्रशंसक ___रविकांत यादव



,%20originally%20called%20International%20Working%20Women's%20Day,%20is%20celebrated%20on%20March%208%20every%20year_.jpeg)











