महिसासुर के संताप से पीड़ित सभी देव , माँ पार्वती के पास पहुचते है | व रक्षा करने को कहते है | परन्तु महिसासुर के भय से डरे व्याकुल देव , | आदि शक्ति माँ पार्वती से संदेह व्यक्त करते है , व कहते है | ब्रम्हा के वर अनुसार कोई देवी ही हमारी रक्षा कर सकती है | परन्तु महिसासुर अत्यंत दुर्गम राक्षस है |
तब आदि शक्ति कहे जाने वाली माँ पार्वती अपने नवरूप प्रकट करती है | तब सभी देव उन्हें अपना तेज व दिव्यास्त्र देते है | उनके पिता पर्वतराज हिमालय के राजा हिमवान उन्हें वाहन शेर भेट करते है | व दुर्गम राक्षस को मारने वाली को दुर्गा नाम सम्बोधित करते है | जिसका आशय है , जिसको कोई जीत न सके |
चैत्र नवरात्र मनाने का कारण है |
नव देवियो का जन्म ,आगमन |
हिन्दु नववर्ष का जन्म,आगमन |
नयी फसलों का जन्म ,आगमन |
सतुवान पर्व का आगमन |
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म आगमन |
माता मानी जाने वाली नीम के फूलो का जन्म आगमन |
वही शारदीय नवरात्र मनाने का कारण ,नवदिन के युद्ध के बाद महिसासुर का वध व श्री राम का 9 वे दिन लंका पर विजय जिसे हम दुर्गा पूजा व विजया दशमी के रूप में मनाते है |
महिसासुर के सेना से लड़ते समय देवी जब हुंकार करती है ,तब उनकी सभी रूप ,शक्तिया और भी उग्र प्रचंड हो जाती है | देवी ,चंड -मुंड ,शुंभ -निशुम्भ , आदि का वध कर देती है | युद्ध में रक्तबीज कहता है , हे सुंदरी तुम अनुचित युद्ध कर रही हो ,कभी काली बन जा रही हो कभी दुर्गा हो जा रही हो , जो सही नहीं |
तब आदि शक्ति कहती है ,अरे मुर्ख सृष्टि की सारी शक्तिया मुझ से है , ये सारे मेरी ही रूप है | इतना कह माँ अपने सभी रूपो व शक्तियो को समेट लेती है | व सुदर्शन चक्र से सभी राक्षसी सेना का संहार कर देती है | और शिव के त्रिशुल से महिसासुर का अंत कर देती है |
लेखक;-भक्ति भाव से ____ रविकांत यादव for more scan or click ;-











