वो बात आज भी लागू होती है ,लोग कौड़ीयो के भाव बिक जाते है | अफसर से लेकर चाय वाले तक अपनी औकात दिखा ही देते है |
अगर आप समझते है ,ये तो बच्चा है ,या ये तो वृद्ध है, तो आप गलत है | कुछ लोगो की उम्र के साथ यहाँ तक बुढ्ढो तक की हरामीपन ,कमीनापन के साथ जवानी भी बढ़ती जाती है |
ये कलियुग है , भेड़ के खाल में भेड़िये बैठे रहते है ,बस मौका तो मिले ,यही सत्यता है | वर्तमान पीढ़ी के लिए प्यार का बटवारा दौलत हो गया है | सोच के स्तर की कोई सीमा नहीं है |
लेखक;- नागरिक ____रविकान्त यादव for more scan ;-


















































