Sunday, December 29, 2024

व्रत (penance)

व्रत पूजा करते समय स्वार्थ या स्वहित की भावना नहीं बल्कि निष्काम व आत्म संवर्धन ,परोपकार की भावना होनी चाहिए , आत्म शुद्धि होनी चाहिए , आत्म संयम होना चाहिए और सब ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए ,क्यों कि हम जो चाहते है ,वो स्वार्थ है ,परन्तु ईश्वर जो चाहता है ,वो परमार्थ है | 

वनवास भुगत रहे पांडवो को दुर्वासा ऋषि के कोप से बचाने के लिए योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण चावल का एक कण खाकर कहते है ,सारी सृष्टि तृप्त हो जाए ,तो भूखे दुर्वासा शिष्य मंडली अतिशय भोजन से तृप्त जमीन पर लोटने लगते है | 

आत्मसंयम व सोच से आशय है , कल पूजा ,व्रत करके मै  स्वर्ग चला जाउगा | मेरे सारे पाप मिट जायेगे ,मै धनवान, बलवान राजा हो जाउगा आदि आदि | ऐसा सोचना मात्र असफलता है | निरर्थकता है ,मूढ़ता है | 



व्यक्ति व्रत है ,लेकिन आत्मसंयम नहीं है ,उसकी सोच ,आज तो  मै व्रत हु ,कल चाट खाऊंगा ,गोलगप्पा खाऊगा,मोमोस खाऊगा ,जलेबी खाऊंगा आदि आदि | व्यक्ति अपने वासनाओ व चाहतो की कल्पना करता रहता है | अतः आत्म संयम रख कर शुद्ध विचार रखना ,हवन ,यज्ञ,सत्संग ,दान-पुण्य , सेवा व ईश्वर भक्ति में समय लगाना चाहिए |

 लेखक;- व्रत से __रविकांत यादव for more scan or click below qr



             

             













रौब (aura)




















तेजी क्रेजी (boost your computer speed with safest way )

वैसे तो कंप्यूटर में प्रॉसेसर को उसका दिमाग माना जाता है । वर्तमान में i9 प्रोसेसर चल रहा है । व रैम जो इसे तेजी से क्रियान्वित करता है । वर...