वर्तमान समय में कोई भी पेशा चाहे वह शिक्षक का हो या चिकित्सक का एक रोजगार हो गया है, हर पांच किलोमीटर पर कुकुरमुत्ते की तरह मुंह बाए रहते है। जैसे सदियों से प्यासे हो जाल बिछाए मछली के फसने के इंतजार में बस एक बार मरीज हत्थे चढ़ जाए । सारे नियम कानून ईमान धरम ताख पर रख देते है । और अपना सारा ज्ञान अंजान अबूझ मजबूर व्यक्ति पर ही प्रदर्शित करते है। मैं ऐसे कमीनो डॉक्टर का नाम लेना नहीं चाहूंगा । जिनके खुद के दांत बाल दिमाग ठीक नहीं है , वो दूसरों का विशेषकर परिजनों को डरवा कर जबरजस्ती रोगी बना का इलाज भी करते है । इन डॉक्टरों को विदेश घूमने का विशेष चस्का रहता है । बनारस के एक डॉक्टर है,। इनकी सारी कहानी कहूंगा तो इनका हॉस्पिटल सीज हो सकता है । चंगुल में लेके अपनी सीमा भूल गया। आप लोग समझ सकते है। मेरी शिकायत किसी से नहीं है ,बस कार्य शैली से है।
Friday, March 21, 2025
पेशा - रोजगार (occupation)
पहले शिक्षक ,डॉक्टर ,रक्षक, पहले समाजसेवक की भावना रखते थे । फिर कर्तव्य की भावना ,और आखिरी प्राथमिकता रोजगार जिसे आम भाषा में पैसा कमाना बोल सकते है । परन्तु आज के युग में पहले पैसा ,फिर कर्तव्य और आखिरी में भला हो या न हो वो तुम्हारी समस्या तुम जानो । कई जगह नोट किया हु, पाद भी आएगी तो दर्जनों जांच लिख देगे । नोट किया हु ,ग्रामीण और सज्जन व्यक्ति ही इन रोजगार धंधा करने वालों का अधिक शिकार होते है ।
लेखक :व्यथित .....रविकांत यादव M.com BLIS
Health comm. (BHU) And COPA
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