खाना ,सोना ,बच्चे पैदा करना फिर लोभ लालच वर्चस्व के लिऐ अनायास लड़ाई करना ,ये लक्षण जानवरों का है । अगर यही हम करे तो हममें और जानवरों में क्या अंतर रह जाएगा । ये तो वही बात हुई कि जानवरों की तरह पैदा होना और मर जाना फिर भी मानव आचरण व जीवन बोध हुआ ही नहीं । सर्वशक्तिमान वो नहीं है, जो धरती पर है । सर्वशक्तिमान वो है, जिससे धरती है । कुछ भी हाथ में नहीं फिर भी सब कुछ मानव हाथ में है ?
चयन और जिम्मेदारी मानव के हाथ में है । परन्तु योग्यता और निर्णय ईश्वर के हाथ में है ।
जुए में हारे पांडव 12 साल वनवास भुगत रहे थे, खाने के लाले पड़ गए तब युधिष्ठिर ने ऋषियों से आग्रह प्रार्थना किया । ऋषियों ने उन्हें मंत्र दिया व सूर्य स्तुति प्रार्थना तप करने को कहा । 108 नामों से स्तुति करने व तप से सूर्य देव प्रसन्न हो कर युधिष्ठिर को अक्षय पात्र देते है, जिसमे पका भोजन समाप्त नहीं होता था ।
यह बर्तन उन्हें अक्षय तृतीया के दिन मिला था ,इसलिए आज भी अक्षय तृतीया के दिन बर्तन खरीदा जाता है । अतः कह सकते है,संकट के समय ही अच्छे लोगों की परख होती है ।
लेखक:- लोगो से __रविकांत यादव
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