Monday, August 11, 2025

मेरे अमर विचार part 11 (my immortal thought my way and my world )


*एक बूंद नींबू सैकड़ों  लीटर दूध को खराब कर सकती है।फिर कितना दूध पानी मिलाए वह सही नहीं होगा। उसी तरह जरा भी द्वेष अनबन से सर्वथा दूर रहे। रहीम को दोहा रहिमन धागा प्रीत का .....कहा भी गया है,गुण मिले तो गुरु बनाओ चित्त मिले तो चेला, मन मिले तो मित्र बनाओ वरना रहो अकेला।

*अगर आस पास गंदगी है,तो नकारात्मक शक्तियां वहां आकर्षित होती है, यहां तक कि अगर मंदिर है,और वहां साफ सफाई नहीं है,कीचड़ है,अंधेरा है, जनता भी कम है। तो वहां भूत प्रेत चुडैल आदि पूजा करने लगती है।
*खाली जेब और कलयुगी विश्वास आपको बहुत कुछ सिखा जाता है।

*समुद्र खारा है,लेकिन उसकी विशेषता भी है। वह कभी बदलता नहीं । थोड़ा जल निकाल लेने से वह कभी कम नहीं  होगा,जिसमें लाखों जीव विचरण करते है।
*छल कपट झूठ फरेब से भरी दुनिया आपको नहीं जानती वो आपको अपने अहम और स्वार्थ से जानती है।
*ज्ञान अगर दूसरों को अंधकार में रखने के लिए है ,तो उसकी महत्ता तुम्हारी वजह से कम हो रही है। हमारे धर्म में कहा गया है , असतो मां सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय।

*मै कभी पाकिस्तान नहीं गया परन्तु पाकिस्तानी मुल्क को इंडिया या भारत नहीं बोलते वो हिंदुस्तान बोलते है,आदर भावना वहां भी है। वो लोग कहते है,हिंदुस्तान ने पाकिस्तानी जनता पर हमला किया वही यूक्रेन भी रूस से यही शिकायत रखता है। ये जनता की आह और बद्दुआ ही है,जो भारत के यात्री विमान व रूस के यात्री विमान क्रैश हो जा रहे है। करे कोई भरे कोई ये न हो ।

*इस विशाल समुद्र में सीप मोती अपने आप में सीमित संयमित रहता है,वही नारियल भी जल या थल सीमित संयमित रहता है। अतः गुण के साथ संसार में अपने तक रहना कला है ।
*जो आपका भला चाहे वो दोस्त जो आपका बुरा चाहे वो दुश्मन चाहे वो आपका सहपाठी हो पड़ोसी हो रिश्तेदार हो शिक्षक या आपका दुश्मन के रूप में दोस्त ।
*गलती स्वीकार करो या प्रतिकार करो इसके सिवाय कोई रास्ता नहीं है।
*मैने एक अपराजिता का पौधा घर लाया देखा तो पता चला ये मटर परिवार से है,अतः हाइब्रिड बनाया जा सकता है।
*कोई भी समाज से परिचित नहीं होता,लेकिन सीखता समाज से है,मेरे एक सर ने कहा था ,डेली न्यूज पेपर पढ़ा करो रोज वारदात देखो ।
*अगर आपको जादू पसंद है,तो फिजिक्स केमेस्ट्री मैथ पढ़िए l अलग अलग फील्ड में चार विषयों की पढ़ाई छोड़े मुझे 11साल हो गये लेकिन अभी भी सपना आता है,मेरी परीक्षा छूट रही है,आ सब रहा है ,मै लिख नहीं पा रहा हु .......।
*जब अहंकार अभिमान सताए तो हमे यह सोचना चाहिए मेरी हस्ती थी भी नहीं और होगी भी नहीं।
*कलियुग में स्वार्थी व हुनरमंद,जरूरतमंद से जिंदा है।
*कामयाबी और नाकामयाबी उतना मायने नहीं रखती जितना आप का साथ होना और न होना,क्यों कि इससे रास्ते और जीवन आसान हो जाता है।
*हर पांच साल के साथ सरकार के साथ दुनिया तकनीक बदल जा रही । परन्तु जो नहीं बदल रहा है इसके लिए लोगों की चाहत जरूरत मतलब। व्यक्ति वही है,बस समय अच्छे बुरे का निर्धारण नहीं करता इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार है।
*एक आजाद जीव व जानवर गुलाम मनुष्य से बेहतर है।
*सफलता के लिए समय के साथ मिलकर परेड करनी चाहिए ।
*तप और त्याग एक दूसरे के पूरक है।


*गांव में रहना,शहर में रहना या विदेश में रहना ये जीवन नहीं बल्कि ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला है।
*छिपाना बताना जताना ये ही रिश्ते निर्धारण करते है । जो सुचिता रखती है। चाणक्य ने कहा भी है ,प्रलय और निर्माण शिक्षक के समीप गोदी मे खेलते है।
*जिस प्रकार महाभारत में कालिया नाग का विष उसी के सिर चढ़ गया ठीक उसी प्रकार ईर्ष्या क्रोध का जहर मानव मस्तिष्क पर चढ़ जाता है,वो अनियंत्रित हो जाता है।
*पर्व त्यौहार हमारी अंतरात्मा को जगाने के लिए आते है। जो जग गए ठीक, वरना हानि और खोना। ये सीख और खुशी है। जीवन ऊबने से अच्छा उत्साह व उमंग में जियो।
*छोटा सा बवंडर विकराल रूप धारण कर लेता है,उसी प्रकार नफरत क्रोध विकराल रूप धारण कर लेता है। इनसे बाहर और बच कर रहे । ऐसे लोगों से दूरी भली।
*शिष्टाचार या नैतिकता हासिल करने की विषय वस्तु नहीं है,यह व्यवहार व आचरण  में शामिल होती है।
*कामयाब होने से ज्यादा जरूरी है,दुनिया को समझना।
*जिस दिन आप अपनी आचार चटनी प्याज छोड़कर दूसरे का पिज्जा बर्गर देखने लगेगे सच्चे अर्थों में आपकी शांति दोनों अर्थों में भंग होना प्रारंभ हो जाएगी।
*गंदे छोटे लोग वो है,जो सोचते है, हवा पानी भी तेरी नहीं है।
*साथ और प्रतीक्षा में समय न देने वालो से संगत नहीं की जाती ।


*क्रिकेट ताकत और चुनौती का खेल है,आज यह दो देशों की साख का पर्याय बन गया है। जो देश इसे महत्व देते है । उनके लिए यह खेल नहीं दो देशों की प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है।
*ये कलियुग है,इससे पहले कभी भी ऐसा अधर्म और अन्याय किसी युग में शायद ही हुआ हो,आज न विक्रमादित्य का सिंहासन है, न वैसा न्याय, न पहले के अच्छे बुरे किरदार,सच ,फरेब ,झूठ, ज्ञान विज्ञान, मान सम्मान,अमीरी गरीबी,बड़ा छोटा, रिश्ते नाते,अपमान ,अहंकार,प्यार ,नफरत  इतने मजबूर कभी नहीं हुए जितने आज है। गलत अर्थों में व गलत लोगों से कलियुग में इनकी चरमता है। कह सकते है,बुरे व्यक्ति से बुरे कार्य भी शर्मिंदा है। माना पहले भी धन प्रधान था,तो शायद आज भी है,लेकिन ये लोग नहीं थे,जो आज है।
*न्याय अगर पीड़ित को मिलता है तो उसके साथ समाज को भी खुशी मिलती है,एक राहत और आदर्श स्थापित होता है। अगर जज या अन्य पैसा लेकर गलत फैसला देता है तो उसे अंदर से कभी खुशी नहीं होगी,पैसा देखकर भले वो दोनों मुस्कुराए पर वो शैतानी मुस्कुराहट होगी,तमाम व्याधियों से पीड़ित वो चैन सुकून को भागता फिरेगा और उसकी आने वाली पीढ़िया पीड़ित व पराभव होगी।
*तुम्हारा कार्य है,उदय होना अपने पथ पर चलना ऊर्जा देना  रोशनी करना भले ही लोग तुम्हारे नीचे प्रदूषण करे ,या यज्ञ हवन आहुति करे ।
*पहचान परिणाम से होती है,चाहे जीवन हो परीक्षा हो या हालात ।
*आज के समय में सीधा सा मतलब और कौतूहल का विषय है, कि अच्छे लोग कम है,और बुरे लोग ज्यादा , हाथी पानी अपने हिसाब से पिता है ।
*आज  समय में विश्वास भी विश्वासघात की मानसिकता के साथ होता है।



*आज के समय में सौदागर बनना अच्छा नहीं तो बुरा भी नहीं है,कलयुगी बुद्ध भगवान का सिद्धांत मध्यम मार्ग सही है।

*आज के समय में अधिकतर व्यंग ताने महिलाओ का काम है ।
*आज के समय में दूर तक निभाना है,तो दूरियां ही सही ।
*आज के समय में धारणाएं ऐसी है ,कि बात करने से भी डर लगता है।
*वेश भूषा पहचान होती तो आज न तोते को पिजड़े में कैद किया जाता न मोरो के पंख नोचे जाते।
*कबूतर,कस्तूरी मृग अपने गुण से है,एक शांति का प्रतीक तो दूसरा सुगन्ध के साथ शुद्धता पवित्रता का प्रतीक है ।
परन्तु एक निरीह, दूसरा सबसे संकटग्रस्त है।
*जिंदगी बच्चों जैसा भी होना चाहिए जैसे शाका लाका बूम बूम की तरह पेंसिल से घर फूल सिनरी बना कर खुश हो जाते है,ये घर फूल आदि मेरा है।
*व्यक्ति को जीवन में दवाओं की तरह भी होना चाहिए कड़वाहट हो, साइड इफेक्ट हो पर भेद भाव न रहे ।
*भारतीय संविधान इतना सरल है नहीं। पर यहां के लोग इसे खिलवाड़ बना रखे है। रोज पांच सबूत दे सकता हु ,इनमें जज भी शामिल है।

*समय के साथ चयन हो A.I की मदद से आड़ी टेढ़ी रेखा खींच पिकासो, विंची, से सुंदर कलाकृतियां बन सकती है।
टीचर से लेकर डॉक्टर तक A.I हो गया है। कंपनीया सॉफ्टवेयर व रोबोटिक हो गयी है। कुक से लेकर लैब तक A.I है। गाड़िया व ट्रेन बिना ड्राइवर के चल रही है। ड्रोन भी है। A.I दक्ष रोबोट सर्जरी भी कर रही है। ये न खाते है, न नशा करते है,न घूस लेते है, न वेतन लेते है,आने वाला समय भी A.I कर्मचारियों का होगा ।अतः प्रकृति,खोज,प्रयोग, नवीनता ही स्थायी है ।



*आज के समय में कुछ लोग दूसरे की खुशी में भी बहुत दुख के साथ शरीक होने व जरूर जाते है।
* आज के समय में कुछ बुरे अशिक्षित मानसिक गरीब लोग आप की पढ़ाई अच्छाई व संपन्नता पर ऐसे ऐसे आरोप लगाएंगे कि आप सोचने पर विवश हो जाएंगे काश मैं भी इन्हीं के बराबर रहता,और यही पर वो बुरे लोग कामयाब हो जाते है । जरूरत है ये समाज ,लाख आपको अंगुलिया दिखाए पर आपकी चमक कम न हो धूप की तरह बढ़ती रहे।
*अत्यधिक आशा अपेक्षा उचित नहीं है,ये आपको शिकायत  
का अवसर प्रदान करेगा । बीज आगे चल के खुद फल और  बीज हो जाता है, अतः निर्भरता समय स्थान तक ही उचित है।

*प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कंपनी एक दूसरे के उत्पाद का ख्याल रखती है । 
*कारवा ,कतार, हुजूम  ये सतत प्रक्रिया है,लेकिन जो बात मायने रखती है आगे के व्यक्ति द्वारा मार्गदर्शन ये न स्वार्थ है न जिम्मेदारी ये एक अच्छी भावना होनी चाहिए ,राष्ट्र ,चरित्र, ज्ञान ,अच्छाई के निर्माण की जिसे प्रेरणा कहते है। उस स्थिति से उबरना और स्वयं को रखना शिक्षा का आधार है।
*बहुत बड़ा बड़ा सोचने करने से अच्छा है,पहले कुछ छोटा ही करे क्यों कि बड़े बड़े मीनारे महलो छोटे छोटे ईंटो के नींव पर ही टिकी रहती है।
*मौसम की मार सहनीय है,पर फितरत की मार नहीं ।


*जिंदगी फिल्मों की तरह है,बनने में सालों लाखो का खर्च ।
जनता को पैसा वसूल मनोरंजन । और 3 घंटे में अच्छी बुरी तरह तरह की भावना लेकर घर चली जाती है। वैसे ही समाज, दर्शक और आप के प्रति उनकी अच्छी बुरी भावनाये ही आपकी जिंदगी की कमाई है।

*जल्दी का काम अनदेखे दलदल में फंसने जैसा है।
* आत्म सम्मान की अपेक्षा रखना विष समान है।
*आप दुनिया को मूर्ख बना सकते है,पर अपनी अंतरात्मा को नहीं ।
*कर्मों का बोझ लेके ,जाना पड़ता है।
*अहम की भावना एक चींटी भी पाल लेती है,कि उसने दाने का बहुत बड़ा बोझ उठा रखा है ।
*आज के युग में मिलो बोलो सबसे लेकिन अपना समय मत दो।
*संगत से पारस से लोहा सोना बन जाता है ,वैसे ही अच्छी बुरी संगत से जीवन सँवर व बिखर जाता है ।


*शांति और प्रेम हर के जीवन का अभिन्न अंग है ,वरना आकाश का राजा चील बाज अपना घोंसला न बनाता।

*जीवन का एक ही लक्ष्य रखने वाले सार्थक है,उन्नति और आत्मसंवर्धन ।
*जिंदगी में, जैसे फिल्म समीक्षक होते है,वैसे ही तरह तरह की जनता आपको जज करती है ।
*फसलें व धन समय पर ही मिलता है, चाहे कर्म हो या ऋतुए शॉर्ट कट और असंवैधानिक परेशानी और दुख का कारण बनेगी।
*आपकी अंतर्रात्मा आपकी सफेदी और कालापन निर्धारित करती है ,इसमें कपड़ों और पैसों का कोई योगदान नहीं होता ।
*सर्वोत्तम के लिए कई स्रोतों से संपर्क करे छानबीन करे चाहे वह रिसर्च हो या मार्केटिंग ।
*प्रार्थना और सोच दोनों में पवित्रता होना बहुत आवश्यक है।
*एक मजदूर भी शाम की चाय पिता है,और एक रहीस भी परन्तु एक को शुगर और अनिद्रा रोग है और दूसरे को स्वाद के साथ सुकून की नीद।
*जिस हवा और भार से पत्ते का वजूद है,उसी से टूटकर एक दिन वह जमीन पर भी गिरता है । अहंकार आदि की स्थितियां एक जैसी कभी नहीं रहती।
*मान लेते है आप शांत है,संसार शांत है,पर समय कभी शांत नहीं है,वो आपकी शांति भंग करने के लिए ही उत्पन्न है।

*जुगनू गलियों में नहीं खुले पेड़ों खेतो सीवानों में चमकते है,चमकना है तो,क्षेत्र राहों का चयन करना होगा।

*बांस पर चढ़कर चाँद तक नहीं पहुंचा जा सकता,उसी तरह किसी के सहारे से बड़ा नहीं बना जा सकता।
*माइथोलॉजी ज्ञान आज भी हमारे जीवन में लागू होता है,जब हम धर्म संकट व परेशान हो तो इनको स्मरण कर सीख व रास्ता निकाल सकते है ।
*जिंदगी में हर चीज परफेक्ट नहीं होती,स्वयं पर विश्वास करे व रिपेयर करे । जिंदगी में हर जगह आप महाराजा नहीं है,अंतिम विकल्प तो हमेशा है।
*आज हम विज्ञान की दृष्टि से जितना उन्नत होते जा रहे है,उतनी ही कुचेष्टा भी कर रहे है,चाहे वह कृषि हो ,चिकित्सा हो,रक्षा हो, प्रकृति हो या अन्य तकनीक,अपने स्वार्थ में विज्ञान का उपकार के रूप में प्रयोग हो अपकार के रूप में नहीं ,अतः कह सकते है,ज्ञान विज्ञान सृजनता में ही निहित है।
*करुणा का भाव सर्वोपरि है, क्यों कि यह अधिकतर दिल दृष्टि से अन्य के लिए उत्पन्न होता है ।
*पुरुषार्थी का गहना सेवा भाव है।
* दूसरों की कठपुतली होने से बेहतर कठपुतली की तरह निर्जीव होना ठीक । अन्य अपना व्यक्तित्व खो देने वालो पर शोभा नहीं देगा ।
*बिना छुए भी अच्छाई महसूस हो जाती है।
*निर्णय लेना, करना, सीखना सिखाना ये सदा विवेक मांगता है,इसी से आप का अस्तित्व निर्धारित होता है।
*आप की कमाई आपकी धन दौलत नहीं आपकी सोच से उपजी अच्छे बुरे विचार है,वो बाद में उसी रूप में फल स्वरूप मिलते है।
*आज के समय में एहसान का बदला अपमान से मिलता है ,शर्त ये रहती है कि मेरी खुशी न देखो मेरी खुशी में शरीक न हो । गिरते समाज की सोच में कि उसी की नजर लग सकती है ।
*सभी घरों में ताले और दीवारें भिखारियों तक को सोचने पर विवश कर देती है । वो अच्छा सोचे ,बुरा सोचे सामाजिक सोचे या अपनी सोचे ।
*अपमान भी मृत्यु समान ही है ।
*आथित्य की गरीमा का भी पालन करना चाहिए अन्यथा महापाप के भागी होगे ।
* ईर्ष्यालु चोर डाकू से भी खतरनाक होते है।
*आपका अधिकार के साथ आपको दबा के रखने व सोच वाले बहुत निम्न श्रेणी के होते है, इनसे दूरी के साथ मित्रवत व्यवहार कभी न करो ।
*आज के समय में लोग अपना बनने से ज्यादा तुम्हारा बिगड़ने में ज्यादा खुश होते है । और ये लोग आप के आस पास करीबी ही होते है।
*बोलो उन्हीं से जिनके चेहरे पर मुखौटा न हो ।
*पीतल और सोना दोनों एक रंग के होते है,अतः परख एक बार हो ।
* आकर्षक फल परन्तु जहरीला,ऐसा ही व्यक्तियों में होता है,एक बार में ही सावधान रहे ,बार बार धोखा खाने वाला मूर्ख नहीं पागल होते है।
* बात बात पर तौहीन शब्द तानाशाही है,ये आसुरी प्रवृति के होते है।
*बगुला मछली देख कर चोंच मारता है,वही दुर्जन सज्जन देख कर मौका परस्ती करते है।
*रेगिस्तान में रह के बारिश की आशा नहीं की जाती । अतः चयन अपेक्षित हो ।
*विष से भरे जीव जंतु के लिए उन्हीं का विष प्राणघातक होता है। 
* घाघ मानव काट ले तो बचने की संभावना नहीं रहती।


*अच्छाई जमीर पर जोर नहीं चलता युयुत्सु आखिरी क्षण में 

युधिष्ठिर की सेना में आ गए । ये सभी के अंदर होती है ,और वो ही विजेता होता है ।

*जीवन में एक बार ध्यान रखना कभी हतोत्साहित नहीं होना एक डाल टूटेगी तो दूसरी टहनियां जरूर आएगी ,एक रास्ता बंद होगा तो दूसरा जरूर होगा । एक ठोकर मिलेगी तो दूसरा कदम जरूर थामेगा। एक बार असफलता मिलेगी तो बार बार नहीं मिलेगी । कहावत व कबीर दोहा भी है, मन के हारे हार है मन के जीते जीत .....एक फिल्म आयी थी चन्दु चैंपियन प्रेरणा स्रोत । परिस्थितिया हमें और दक्ष प्रवीण करेगी एडीसन ने कहा था ,असफलता, सफलता की सीढ़िया है। कवि बृंद रचित दोहा भी है ,करत करत अभ्यास से जड़मती होत सुजान रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान ।
*प्रशंसा और प्रेरणा उन्हीं से लो जो उसके काबिल हो ।
*तन्हाई अगर चिंतन है,वो तन्हाई नहीं संसार है।
*समय आगे चलता है,और लोग भी आगे की सोचते है,परन्तु उन पदचिन्हों का सम्मान हो जिनसे रास्तों पर लकीरें बन जाती है।
*भविष्य का सोचना विद्वानों व वैज्ञानिकों का काम है,परन्तु वर्तमान सोचना, मानवता हित ,सेवा, संस्कार, सज्जनता, नेक सदाचारी मानवता के रूप में ईश्वर का काम है।

लेखक: विचारक___रविकांत यादव

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वैसे तो कंप्यूटर में प्रॉसेसर को उसका दिमाग माना जाता है । वर्तमान में i9 प्रोसेसर चल रहा है । व रैम जो इसे तेजी से क्रियान्वित करता है । वर...