Monday, December 22, 2025

जैसी करनी वैसी भरनी (tit for tat)


दो भाई थे घुमंतू और सुमंतु एक जहां चालाक  और चतुर था वहीं दूसरा सभ्य शालीन और सज्जन था । सुमंतु पांचवीं में पांच बार फेल हो कर घर से भाग गया । वह नाई की दुकान पर बाल कटाते कटाते स्वयं एक नाई की दुकान खोल लिया । देखते वहां से आने वाले पैसों से वह संतुष्ट नहीं था । उसने एक डॉक्टर के हेल्पर की नौकरी कर ली । कुछ दिन बाद उसने उस डॉक्टर की दुकान भी छोड़ दिया व डिब्बा लेकर स्वयं कान का डॉक्टर बन गया ,एक एरिया के बाद दूसरी जगह वह जाता नहीं था । धीरे धीरे वह पैसों में खेलने लगा उसका भाई सुमंतु सभ्य साधारण खेती  किसानी में लगा रहा  ।घुमंतू लोगों को कान में रोग का भय दिखा कर अपना कोई फर्जी कर्णफूल तेल पानी बेचता था ।


इस तरह एक दिन अन्य जगह एक मरीज ने घुमंतू को पकड़ लिया उसकी बड़ी पिटाई कर दी हाथ पैर तोड़ दिए पुलिस आ गई । घुमंतू अब जेल चला गया उसकी सारी संपत्ति और पैसा खत्म हो गया अपमान अलग हुआ । उसके भाई सुमंतु ने कहा भाई दस जगह पैर रखने से अच्छा एक ही काम निष्ठा से करो । कोई कितना भी धूर्त चालाक हो उसका फल उसे अवश्य ही मिलता ही है । अतः जीवन जीना भी श्रम के साथ सार्थकता है । स्वार्थ सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता है ।


लेखक :घुमंतू डॉक्टर से परिचित ____रविकांत यादव 












तेजी क्रेजी (boost your computer speed with safest way )

वैसे तो कंप्यूटर में प्रॉसेसर को उसका दिमाग माना जाता है । वर्तमान में i9 प्रोसेसर चल रहा है । व रैम जो इसे तेजी से क्रियान्वित करता है । वर...