थोड़ा हेल्थ की दृष्टि रखता हु, तो इसके गुण जानते है,यदि इसके पत्ते सुबह लार के साथ चबा कर पानी पी ले तो फायदे मंद है , पानी भी हल्का मीठा लगने लगता है । इसके दातुन का कसैला पन होता है ,जो दांतों को साफ के साथ मसूड़ों में कसावट लाता है । कभी एक टूथपेस्ट आता था ,बबूल जो सिर्फ नाम का था । इसकी फलिया पशुओं के दूध के लिए फायदेमंद होती है । मैने इसकी फलियों के बने आचार भी खाए है, जिसका स्वाद खट्टा मीठा कसैला होता है , इसके साथ रोटी खा सकते है। फिर पानी पियेंगे तो मीठा लगेगा।
इसके फूलों तक पहुंचना मुश्किल है,परन्तु उसकी चाय व काढ़ा और दंत मंजन बनाया जा सकता है । कभी बबूल के छाल मिली औषधि आती थी , जिसे संजीवनी सुरा के नाम से जाना जाता था । इसकी तासीर ठंडी है, अतः गर्मियों में भी उपयोगी है । इसके बबूल के तमाम फायदे गूगल पर बताए जाएंगे परन्तु ये पुरुष महिला के सभी प्रजनन अंग व यौन संबंधी रोगों की दवा है, हड्डियों को मजबूत व जोड़ दर्द में लाभकारी होता है , यहां तक शुगर में भी लाभप्रद है । इसके गोंद के लड्डू विश्वस्तरीय विशेषता रखते है । इसके पत्ती,टहनी,फल,फूल,गोंद, यहां तक की वृक्ष की लकड़ी भी उपयोगी होती है ।
आंध्रप्रदेश से अलग बने तेलंगाना में सुना है,जंगल काटा जा रहा है। जीव जंतु भटक कर शहर सड़क पर आ गए है। उनको कौन पालन पोषण करेगा ? इतने बड़े देश को क्यों नर्क बनाने पर तुले हो । वैसे भी भारत पेड़ पौधे जंगल काटने के मामले में 2020 तक दूसरे स्थान पर था। Save nature,save country
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