इस पर सज्जन सोचते हैं, ग्राहक तो सही है न, कपड़े व वेशभूषा भी ठीक-ठाक है। कहीं ये बावला तो नहीं, इसकी मती तो नहीं मारी गई है। बता दो ये लेने आया है या देने। चल चल ,ओ हो । जो भी हो मुझे अपने सौदों से मतलब है।रुको रुको।
सज्जन बोलते हैं, महोदय ये मेरी चांदी की लुटिया नहीं बिक रही ,उसका कारण इसमें नक्काशी में छोटा सा दाग है। कृपया आप इसे खरीद लीजिए।
लेखक:- तुच्छ सांसारिक___रविकांत यादव ।









