सच्चे अर्थों में कहे तो इसकी फिकर ही क्यों करनी ।
भूत बीत चुका ,वर्तमान तुम जी रहे हो ,भविष्य तुमने देखा नहीं । अपने कर्मों को किसे सौंपेगे ,सृष्टि की रचना तुम्हारे लिए है , सृष्टि तुमसे नहीं है । जो तुम्हे लाया है वहीं ले भी जाएगा । तुम्हारे चेहरे पर जितना अंधेरा है,उतना ही उजाला भी होगा । कर्म तुम्हारे वश में है ,तो तारण हार भी है। परन्तु तुम ईश्वर के वश में रहो, तुम्हारे हर कर्मों का हिसाब होगा । आज नहीं तो कल होगा । हर एक एक पल होगा ,नीर क्षीर धीर से हल ,जल - कल होगा।
*चयन की बात हो तो दिल या दिमाग दोनों में से एक ही को चुने अन्यथा आप को समस्या तकलीफ हो सकती है ।
*यदि तुम आजाद देश में गुलामी कर रहे हो तो उससे अच्छा सरकार की जेल में रहकर गुलामी करो । अपने मौलिक अधिकार के लिए लड़ो।
*नैतिकता का पतन तुम्हारा पतन है ।
*मान और अपमान जीवन रूपी सड़क का वह ब्रेकर जहां आपको रुकना ही पड़ता है।
* लालच और स्वार्थ दोनों चचेरी बहने है ।
* हर जीवन की यही कहानी है ,आती जाती रवानी है ,बंद मुट्ठी लाख की, खुल गई तो ख़ाक की, जल गई तो राख की, फल गई तो साख की ।
*विश्वाश ही विश्वासघात को जन्म देता है,जिसमें पराये ही ठीक है।
*भारतीय नारियों को शिकायत रहती है,अल्फा बीटा, एमटेक,बीटेक करके बच्चा ही खेलना है ,तो क्या फायदा ।
*यदि आप अकेले है,तो यक़ीन मानिए आप दुनिया को सच्चे मायने में देख रहे है।
*जिंदगी भर धन मन के लिए दौड़ने वाले के पीछे अंत में भी चार लोग दौड़ने वाले मिल ही जाते है।
*दिल दर्द दुआ को देखने वाले महानता की तरफ अग्रसर होते है।
*यदि आपको अपने जॉब से प्यार नहीं तो यक़ीन मानिए उसे छोड़ दीजिए ।।
*व्यथा तब होती है ,जब 100% फिटनेस पर भी कुछ हो नहीं पाता ।
*नई शुरुआत न करने वाले खुद से तो हारते ही है ,दुनिया से भी हार (अपमानित) हो जाते है।
*पढ़े लिखे मूर्खो व नीच व्यक्तियों की पहचान ये होती कि वो दूसरों की संपत्ति को अपना समझने लगते है । जैसे वेबसाइट हैक करने की कोशिश ,पीठ पीछे अनुपस्थिति में घर खंगालना , इन्हें हम चोर भी नहीं कह सकते क्यों कि चोर तो चोर होता है ,परन्तु इनके पास अधिकार होता है विश्वास का । ये लोग खुद तो गिरे रहते है ,और ताक में रहते है, कि तुम भी उन्हीं के श्रेणी में आ जाओ । और ये लोग अपनी जिंदगी का सारा ज्ञान बस तुम्हारे लिए ही रखते है । अगर ये लोग उसी कार्य ज्ञान मतलब का प्रयोग स्वयं हेतु करे तो तुमसे बहुत आगे चले जाय पर फितरत से मजबूर वो कहावत है न कि कुत्ते की दुम टेडी ।
*बड़े लोग बड़े तभी है जब तक उनके पास छोटे लोग है।
*प्रेम के साथ विचारों में भी समानता जरूरी है।
*शरीर की शुद्धता कोई मायने नहीं रखती भले आप नहाए या न नहाए इत्र लगाए या न लगाए पर मन और वचन की शुद्धता मायने रखती है,क्यों कि उसका उद्गम भावनाओं से होता है।
*कपड़े गंदे हो तो दृष्टि बदलती है ,पर विचार गंदे हो तो सृष्टि बदलती है।
*जिंदगी में सब कुछ आपके अनुसार सदैव सही नहीं होगा अतः आप नीरस न हो , ये आपकी एक और परीक्षा है।
*तुम्हारा शरीर तुम्हारी व्यक्तिगत पूंजी हो सकती है ,पर तुम्हारी सोच देश व समाज की पूंजी होनी चाहिए।
*सौ लोगों में एक लोग मानवता के लिए आगे आते है,और कुछ लोगों के लिए वही एक व्यक्ति सबसे ज्यादा अप्रिय होता है , ऐसा इतिहास कहता है।
*बच्चों में जरा भी छल कपट झूठ फरेब ईर्ष्या द्वेष नहीं होता
जहर तो उन्हें समाज से मिलता है। जाहे घर हो या बाहर ।।
दिल साफ रखो वरना चेहरे पर धूल कालिख जमने लगेगी।
वैसे भी आज कल प्रदूषण बहुत है।।
*आश्चर्य की बात है ,आज कोई किसी को कुछ नहीं बताता और बताने का बड़ी फीस चार्ज होता है। और आप अनभिज्ञ है ,तो लगातार ठगे भी जाएंगे । प्रसारण सुगंध का हो वैसे भी लोग दुर्गंध से दूर भागते है।
*सबसे बड़ी ताकत तुम्हारी सोच है,अगर यह शुद्ध और सही है ,तो दुनिया की कोई ताकत तुम पर कब्जा नहीं कर सकती।
*कीमत व्यक्ति की नहीं उसके हैसियत व स्थान की है । इसी के आधार पर न्याय व धारणा है ।
*बच्चों की तरह कूदा फांदी व शरारतें करना भी जरूरी है ,इसी आधार पर अधिकतर देशों में पर्व भी है ,जैसे होली, हैलोविन ,टमैटो गेम, मड़ गेम ,आदि आदि ।
*माइथोलॉजिस्टो के अनुसार जब माता शबरी ने राम को बेर दिया तो राम खा रहें थे ,इस पर लक्ष्मण बताते है ,यह बेर जूठे है ,और फेक दिए, माना जाता है ,उसी जूठे फेंके बेर से संजीवनी उगी थी जिसे मृत्यु शैय्या पर पड़े लखन को खानी पड़ी और उनका जीवन उपचार हो सका। जिस स्थान पर श्री राम ने दोने में बेर खाया था ,उस कृष्ण वट के पत्ते आज भी दोने के आकार के होते है ।
महाभारत का एक प्रसंग है , 16 साल का बालक दिन भर युद्ध करते विजय प्राप्त करते जब 7 महारथियों ने घेर कर धर्म विरुद्ध हमला किया तब दिन भर युद्ध से थके व घायल मृत्यु स्थिति में अभिमन्यु ने कर्ण को इशारा कर एक छोटे से गड्ढे में एकत्रित से जल मांगा जिसे कर्ण ने अस्वीकार कर दिया ,माना जाता है उसी जगह गड्ढे में कर्ण के रथ का पहिया धस गया जिसे कृष्ण के समतुल्य कहे जाने वाले सारथी शल्य और स्वयं महारथी कर्ण निकालते रह गये और उसी बेबस अधर्मी अवस्था में उसका वध हो गया ।।
* ज्ञान समाज से है अतः समाज में व समाज के लिए भी समय दो।
*तुम्हारी रौनक तो बस आज है ,लेकिन इस आज में तुम क्या हो?
* अंतर्रात्मा और आत्मा,अच्छाई और बुराई पूरे ब्रह्मांड में है। बस तुम और तुम्हारा कर्म इस संसार में अटका है।
*आज के समय में यदि आदमी की तुलना जानवरों से या मुहावरों से की जाय तो जानवरों की तौहीन हो जाएगी अतः फितरत को भाँपो सतर्क रहो दूर रहो।
*जिंदगी भर उपलब्धियों व बड़े बनने के चक्कर में जिंदगी बीत जाती है, जिसके लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है।
हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते है।
*आज की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि जिससे आप सीखे या तो वो आप से जलने लगेगा या तो आप ही उसे चैलेंज करने लगेगे। इसलिए भय तो रहेगा ही ।
*5 घंटे ही आप की सोच को स्थिर होना सार्थक करने के लिए पर्याप्त है ,आप सोचते है, कि आप धरती के राजा है,तो आप है।
*उदार स्वरूप रखे, न जाने कब किस वेश में ईश्वर मिल जाए। सभी जीव में ईश्वर है।
*धन चयन हो ,क्यों कि आज ये हाथ मुंह है,परन्तु धन नगण्य है,क्यों कि यह हवा पानी और जीवन नहीं है।
*जो दिल में आये उसे दिल में रखो और जो दिमाग में आये उसे उसी अनुसार उत्तर दो ऑल इज वेल केवल फिल्मों में होता है ।
*जो अपने क्रोध व आंसु दोनो को नियंत्रित कर ले सच्चे मायने में वही मर्द है।
*एक रिक्शे वाला भी 60 साल का है ,और उस पर बैठने वाला भी 60 साल का जिरह इस बात पर हो रही है ,मेरा दो रुपए कम हो रहा और मेरे पास फुटकर नहीं है 5 रुपए का सिक्का है।
*अच्छाई को तब शर्मिंदा होना पड़ता है ,जब पूछा जाता है तू मेरा है, ही कौन ।
*आंखों में धूल झोंकने वाले से बड़ा चोर धरती पर कोई नहीं हो सकता ।
*हर जगह अपनी पहचान नहीं बताई जाती, सीखने का अवसर खो देगे।
*आदमी को कुत्ता बोला जा सकता है,परन्तु विचारणीय है कि कुत्ते को आदमी नहीं बोल सकते ,जो उसकी फितरत है।
*किसी भी क्षेत्र में प्रचलित,मांग ,विकास,खोज,परीक्षण ही विज्ञान है। अतः आज समय ही विज्ञान है,जो हासिल है,उसमें सबसे बड़ा हाथ समय का है। जो इसका सम्मान करता है,वो योग्य है।
*विपणन का सार क्रय विक्रय लाभ हानि सोच व समय है।
*अगर हम दुनिया के विषय में ढेर सारी सोचते है,तो पहली सोच ये हो कि हम मानव है, और नियम सिद्धांत और धर्म को भी हम जानते है।
*जब दिल में मैल भरा हो तो निमंत्रण नहीं दिया जाता व न किया जाता है। तुलसी का दोहा है,आवत ही हर्षै नहीं ,नैनन नहीं स्नेह ........
*जिस प्रकार से हथियारों की मांग और भूख बढ़ रही है,ऐसा लग रहा है ,मानव मानव का ही भक्षण करना चाह रहा है।
*बात पसंद की है ,वरना नाली के कीड़े साफ पानी में नहीं मरते, मधुमक्खियां भी केसर से शहद नहीं बना सकती ।
मैंने अपने जीवन काल में न्यूज में दर्जनों बार नरभक्षण का न्यूज पढ़ा है। कोई खोपड़ी से सूप बना रहा है तो कोई कलेजी खा के दारू पी रहा है आदि आदि कोई डॉक्टर डेथ है जो मौत की हॉफ सेंचुरी बना देता है ।
*एटीट्यूड आना भी जरूरी है, जिसमें आपको कुछ विशेषता का एहसास होगा।
*आज हम जो बोयेगे कल वही काटेंगे नफरत तो नफरत मिलेगा ,बंदूक तो बंदूक मिलेगा,प्यार दोस्ती सहयोग भाईचारा तो यही मिलेगा भले हम रहे या न रहे जैसे मौसम ऋतुएं मानसून फल फूल आदि सतत चलते रहते है । ये भी पीढ़ियों दर पीढ़ियों चलता रहेगा । हम अपने बच्चों समाज को क्या सीख दे रहे है। ये मायने रखता है। हरियाली खुशहाली मायने रखती है। जो बीज बोयोगे वो तो अंकुरित होगा ही । सतत प्रक्रिया आज है,जो हमारे हाथ में है । ईश्वर ने तुम्हें प्यार दे के भेजा है,लेकिन तुमने नफरत बुराई पाल रखी है । मरना तो सभी को है,मैने कही नफरत नहीं लिखा है,मेरे लेख रचना मानवता के हित के लिए सदियों तक रहेंगे। जिसे जो अच्छा लगे गांधी जी की तरह ताबीज बनवा ले। यहां मेरा गाना है जिंदगी एक सफर है,सुहाना.....
*तकनीक जहां राहत है,वही आहत भी है, एक विस्फोट से हम बड़े बड़े पत्थर तोड़ सकते है वही दूसरे जरा सी लापरवाही से हम खुद विध्वंस हो सकते है , सावधानी हटी दुर्घटना घटी। अतः कह सकते है जो तकनीक पर ही निर्भर है,उसके लिए ये आत्महत्या का साधन भी है।
*प्रक्रिया विज्ञान की पहली सीढ़ी है।
*यदि आप परफेक्शन चाहते है ,तो वो काम आप को भी आना चाहिए जिसमें आप संपूर्णता चाहते है।
*चलो मैं और मेरा गलत ही सही लेकिन तुम तो मशहूर हो गए।
* बच्चों की किताबों को बहुत सोच कर ही उल्लेखित करना चाहिए क्यों कि उसकी घटनाएं व त्रुटियां बालमन के मन पर नहीं हृदय पर अंकित होती है।
* प्लास्टिक के फूल प्लास्टिक के फल प्लास्टिक के पेड़ कुछ दिन बाद खाना दवा सुगंध भी मिलने लगेगी।
*मेंटल होना से आशय जिससे प्रेम होना चाहिए उसी से शत्रुता ,नफरत , बैर ,संदेह पालना ।
* षडयंत्र करने वाले एक दिन खुद सड़ जाते है ।
*काम के समय बहाना बनाने वाले लोग वास्तव में सबसे बड़े मतलबी होते है, इनको स्वयं से मतलब होता है ,दूसरों से नहीं ।
*जिम्मेदारी से हट जाना कायरता है ।
*प्रतिशोध तब उत्पन्न होता है,जब अन्याय होता है।
*पेड़ पर कुछ पत्तियां हो तो न तो उसकी शोभा बढ़ती न छाया मिलती हैं, उसी तरह जुड़ कर कार्य करो ।
*दो तीन गलत लोगों के आपके खिलाफ होने से पूरी दुनिया आपके खिलाफ नहीं होती।
*शांति मनोरंजन बच्चों के बीच खेल व पढ़कर भी हासिल की जा सकती है।
*सज्जनता अवसर नहीं पहचान है।
*चार पांच भेड़ियों के साथ न देने से शेर की बादशाहत कम नहीं हो जाती ।
*स्वयं की जिम्मेदारी ज्ञान, पुरुषार्थ,पैसा तीनो है।
*परेशान तो सभी है,कोई आटा में परेशान है,कोई डाटा में परेशान है,परन्तु कुछ लोग दूसरे के सैर सपाटा में परेशान है।
*समीर के गानों का मौसम ऐसा है,जैसे बसंत के मौसम में अमिया फूलों के वादियों से चलने वाली हवा। ये गर्मी तो ऐसे बढ रही है ,जैसे राजकुमार संतोषी के फिल्मों की कहानी । उस पर हवाएं मौसम पानी सुपर हिट गानों का काम कर दे रही है। 90 का दशक फिल्मों गानों का स्वर्णिम काल था ।जब 95 में इंटरनेट पनप रहा था ।
*यदि आप अपने ज्ञान का सदुपयोग नहीं कर सकते तो उसका गलत उपयोग भी मत करिए ,यक़ीन मानिए ईश्वर देख रहा है ,वही आपके कर्मों का निर्धारण जरूर करेगा।
चाहे आप फ्रॉड हो,हैकर हो,चोर हो,जलने वाले हो ,या साजिश रचने वाले हो ,ईश्वर के दरबार में कर्म दस गुना सौ गुना होकर मिलते है। ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती।
*सूरत तो बदसूरत है,लेकिन सीरत की चाहत क्यो?
*दायरा सिर्फ सोच का है,सीमित हो या असीमित अच्छा हो या बुरा।
*राजा मरा ही नहीं मुसहर राजमहल बाट लिए ,ये आज के रिश्तेदार है , हाथी को देख कर दूर से भौंकने वाले कुत्ते केवल झुंड है।
*गरिमा का पालन हर जगह नहीं किया जाता और गरिमा का खंडन भी हर जगह नहीं किया जाता । नजरिया हो जरिया नहीं ।
*दस जगह भटकने से अच्छा है,दूर ही सही लेकिन एक जगह ही भटकों।
*विद्या अर्जन का एक समय होता है,उसके बाद ये भारी लगने लगती है ,और जल्दी कंठस्थ नहीं होता।
*रोग जोग भोग जीवन चयन है,अतः संतुलन बना के चलना चाहिए । जहां अति वर्षा तबाही और बर्बादी हैं,वहीं वर्षा न होना सूखा भी त्राहि त्राहि है।
*अप टू डेट रहना स्मार्टनेस है।
*कभी पानी फ्री था,हवा फ्री थी,मिट्टी फ्री थी आज ये बिक रही है । जीवन ईश्वर ने फ्री दिया है,लेकिन आवश्यकताये फ्री नहीं है । वर्चस्व जिंदगी में नहीं जीवन में जीवन से हो ।
* जिस फिल्ड में तुम हो , नया नहीं खोजा तो धिक्कार है तुम पर, चाहे वह खेल हो या झेल हो ।
*शब्दों की अहमियत तब पता चलती है ,जब पैकेट व डिब्बों पर रियल ,100% ,फ्रेस आदि आदि लिखा रहता है ,जब थानोस के हाथ जाता है ,तो बोलता है ,नकली है।
*भारत को अगर गर्व होना चाहिए तो टाटा,बिरला,और पारले जी काफी है।
*इतिहास बदल जाते है,लेकिन भाषाएं कम ही बदलती है ।
और ये भाषाएं ही,गद्दारी के रूप में इतिहास है।
*चोरी तो चोरी है चाहे वो प्यार से करो या तकरार से करो।
*प्रकृति की असली इज्जत तो गावो में है, कार्बाइड नहीं कोपर का लुत्फ है।
*भारत में वेद पुराणों अनुसार एक पेड़ 10 पुत्रों के बराबर है,परन्तु उनकी महिमा पशु पक्षियों कीट पतंगों से है,चाहे वह खाये या गाये।
*लोभ भी एक रोग है, लोभी का पेट कभी भरता नहीं और आवश्यकताएं कभी पूरा होती नहीं। ठीक बच्चों की कहानी राजा मिडास की तरह ।
*प्रकृति की बनाई हर रचना में एक नहीं अनेकों आविष्कार है,जहां एक जीवन है,एक जीवन दाता है।
*मनोविज्ञान कहता है, यहां कोई किसी का कुछ नहीं होता अतः कुछ पूछते है,तो मूर्ख की श्रेणी में आते है।
अधिकतर समाज में स्वार्थ की टकराहट होती है।
*भगवान होना और बनना अलग अलग बात है,रावण जहां भगवान बनना चाहता था,और राम भगवान थे। दोनों के चरित्र में जमीन आसामान का अंतर है। समाज में आज भी राम - रावण दोनों मिल जायेगे। किसी की कविता है,कलयुग बैठा मार कुंडली जाऊं तो मैं कहा जाऊं,अब हर घर में रावण बैठा इतने राम कहा से लाऊ।
*दुनिया का सबसे बड़ा बादशाह वह है जिसके जेब में दस रुपए और 8 रुपए वह दान कर दे ।
*जीवन में बहुतों को देखो लेकिन ऐसा व्यक्ति नहीं देख पाओगे जो तुम्हे छोटा बनाने के लिए मरने को तैयार हो जाए। ये वही बात हुई हमके अधमरा कर ओके पूरा करा।
*हमारे हिन्दू धर्म में 84 लाख जन्मों के बाद मानव जन्म मिलता है,लेकिन फिर उसी शरीर में जानवरों जैसा आचरण क्यों ।
*प्रतिकार नहीं आया तो समझो गलत सही की समझ नहीं है।
*जिंदा रहना उतना ज़रूरी नहीं जितना जमीर का जिंदा रहना।
*यदि आप हुक्मरान है,तो याद रहे उसके पीछे लोगों की दुआएं और बददुआएं दोनों है।
*फूड लवर और मेकर के लिए स्वाद ये है ,की जरूरत 2 की है,लेकिन चाहिए 4 ये परिभाषा ही नहीं मार्केटिंग भी है।
*नीम की पत्तियां जिस तरह तराशी होती है ,ठीक उसी प्रकार शरीर को भी तराश देती है। डिटॉक्स करने की क्षमता।
*झूठ फरेब धोखा चोरी मक्कारी षडयंत्र आदि से आप किसी का सब कुछ ले सकते है,लेकिन किसी का व्यक्तित्व नहीं वो फिर से खड़ा होने का साहस व काबिलियत रखता है।
*परजीवी बनने से अच्छा है,दीर्घ जीवी बनो या अल्प जीवी बनो।
*जो सुख को ही काम मात्र बना ले ,वो तपस्वी नहीं वो कायर भी है।
*अश्वत्थामा,अंधक,सांब,जयंत,जा
*विज्ञान का काम है,प्रकृति को सुरक्षित करना न कि उससे छेड़ छाड़ करना , चाहे वह खाना हो पकाना हो या उसे संभाल कर रखना ।
*भारत दूसरा सबसे बड़ा कृषक देश कभी कभी यहां आलू,प्याज,टमाटर,आम या अन्य फसलें सड़ जाती है ,या किसानों द्वारा फेक या नष्ट कर दी जाती है। विदेशों से पैकेट बंद डिब्बा बंद समान भी आता है । लेकिन वो इसे डिब्बा बंद या पैकेट बंद या संरक्षित नहीं कर सकते । गरीब, गरीब ही रहे ये भी सोच है । जागरूकता के हिसाब से यहां अशिक्षा 40% प्रतिशत है। ऐसी सोच उसका बुरा हो मेरा भला हो ऐसे में तुम्हारा भी बुरा ही होगा ।
*खेल प्रेमियों के लिए उनके दिन वापस नहीं लौटते चाहे वो जवागल श्रीनाथ का समय हो या सौरव ,धोनी की कप्तानी हो।
*जोग योग रोग और उपभोग कोई है तो भारत में बाबा रामदेव है।
*बुरा करते करते या तो तुम गोबर के कीड़े ही हो जाओगे या थोड़ी अच्छाई से कोकून से फूलों बगिया तक तितली।
*जीव जंतु सांप बिच्छू आपके स्पंदन से आपका स्वभाव पहचान जाते है, लेकिन आप उनका स्वभाव नहीं पहचान सकते।
*योग बैराग आज के समय में स्वयं के अंतरात्मा में हो, पहले की तरह न बाहरी समाज है न वातावरण ।
गौतम बुद्ध, वर्धमान महावीर ,प्रभु यीशु ,बाबा नानक ,धन संपत्ति होते हुए भी अपने से ही हार गए थे । आजीवन एक सुई तक नहीं उठाई आज इनके धर्म और अनुयाई है।
वही दूसरी तरफ राम कृष्ण हुए जिन्होंने अन्याय अधर्म का प्रतिकार किया ।
*मानवता का पतन तो तब हो जाता है,जब जाति धर्म ऊंच नीच आदि को लेकर धारणा बना लेते है। और यदि फितरत की बात करे तो मनुष्य से बढ़कर कोई नहीं।
*एक बार सोशल मीडिया पर खूब चला था कोई आशिक नोट पर लिखता था सोनम गुप्ता बेवफा है। जिस देश में सती सावित्री की मिशाल और परंपरा है,आज वही सोनम रघुवंशी अपने पति की कातिल है ,पागल मीडिया क्या क्या दिखा बता रही है, उसका पति भी कुरूप बुरा नहीं था।ये भारत है,कहे तो विश्व में ये देवियों के देश के रूप में प्रतिष्ठित है ,गलत सही और गिरता स्तर सोचने पर विवश कर देता है,ये कलियुग है।
*इंटरनेट पर है तो सब कुछ फ्री लेकिन उन्हें जो उचित लगता है ,वो ले लेते है । वरना हर देश का अपना सुरक्षा तंत्र व खुफिया विभाग नहीं होता । वैसे भारतीय वेब ब्राउजर एपिक है।
*यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो पहले पड़ोसी पड़ोसी व धर्म धर्म वाले ही पहले मरेंगे । नफरत दिमाग तक तो ठीक है,लेकिन दिल दिमाग तक पागलपन है।
*जो पढ़े है,वो बढे है,लेकिन जो लड़े है वो कढ़े है।
*प्रभु यीशु को जब सलीब पर चढ़ाया जा रहा था,तब उन्होंने कहा है परम पिता इन्हें माफ कर देना इनकी मंशा गलत नहीं है ,इनके कर्म गलत है । कर्म अपनी जगह है,लेकिन मंशा गलत नहीं होनी चाहिए । यही तुम्हारे लिए सुख दुख का निर्धारण करेगी।
*दुनिया डेंट पेंट सेंट रेंट टेंट पर्सेंट पेटेंट में अटकी हुई है,क्या इन सब से अलग सोच का भी मानवता दिल दिमाग का ment है।
*संग्रह करना अच्छी बात है,परन्तु आज को मार कर नहीं ,ये कल के लिए नियोजित हो ।
*किसी चीज का इतना भी उपयोग उपभोग न करो कि वो विलुप्त हो जाय। अति सर्वत्र वर्जयेत।
*होम्योपैथी उपचार पद्धति में रुचि रखता हु ,हैरानी तब हुई जब देखा कि इसमें विश्व भर की जड़ी बुटीया पेड़ पौधों के साथ जहरीली वनस्पतियां भी शामिल है । आयुर्वेद से प्रभावित है ,लेकिन बिल्कुल अलग है।
*मेरा मानना है,दवाओं का कोई जाति ,धर्म, देश नहीं होता जो राहत व हितकारी हो उसे प्रयोग करो,इसके पीछे महानता छुपी रहती है।
*गोपनीयता हर धंधे में है,और आविष्कार हर क्षेत्र में है । अतः दोनों एक दूसरे के पूरक है,संयम और उपयोग के रूप में अच्छाई बुराई हर जगह है।
*प्रथम दृष्टि में व्यक्ति की पहचान ही आज के समय में सफलता है।
*इंद्रधनुष दिखता है,लेकिन उसके पीछे छिपे कारण नहीं दिखते ,बिजली चमकती दिखती है,लेकिन खतरा नहीं दिखता,जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि,इस धरती पर पॉजिटिव नेगेटिव दोनों लोग है ,नियंत्रण आप को करना है।
*पानी की व नरम सब्जियां अधिकतर सुखा पकाने पर ही अच्छी लगती है ,कुछ मौसमी सब्जियां कद्दूकस कर पराठे व सब्जियां बनाई जा सकती है । वैसे भारत मसालों का देश है ,सबसे ज्यादा प्रकार के मसाले यही पाये जाते है । मांसाहारियों को शारीरिक व मानसिक रोग ज्यादा होते है । 36 राज्यों के साथ विश्व में सबसे बड़ा व ज्यादा शाकाहारी देश भारत है ।
*डॉक्टर तो हर व्यक्ति में छुपा रहता है,चाहे वह जंगलों या अमेजन का आदिवासी ही क्यों न हो । लेकिन उसे सिर्फ ईश्वर पर भरोसा होता है। वही समझ वह डॉक्टर के पास भागता है।
*क्रोध भावना प्रेम में सौ शब्दों का एक जवाब हो सकता है।
कभी कभी एक जवाब का कोई शब्द नहीं होता।
*मौन विवादों से बचने का उपाय है,क्रोध में भी मौन उचित है,भारत में इसलिए मौनी अमावस्या व्रत का महिमा और पालन किया जाता है।
*सूरज चांद ग्रह नक्षत्र तारे ब्रह्मांड वायु जल सभीं की महिमा चलते रहने से ही है,अतः किसी भी पथ पर सदैव अग्रसर रहो । स्थिरता तुम्हारा मूल्य व औचित्य खत्म कर देगी ।
*मधुमक्खियों का काम होता है शहद बनाना,ऐसे में यदि वो अपने झुंड से बिछड़ती हैं तो भी हितकर नहीं,और डंक मारती है तो भी उनकी मौत हो जाति है । अपने काम से ईमानदारी और प्यार करो उसी में हित सार्थकता है। पानी में रहते रहते जोंक भी अहम पाल लेती ।
*प्रेरणा लेना अच्छी और गर्व की बात है,लेकिन प्रेरित से उसे कभी नीचा न दिखाओ।
*मानव धन दौलत जमीन जायदाद के लिए लड़ता रहता है,लेकिन देखा जाय तो ब्रह्मांड के आखिरी छोर तक केवल शून्य है,जिसमें हमारी पृथ्वी धूल के कण बराबर भी नहीं है।और इसी धूल से उत्पन्न वनस्पतियों फल फूल फसलों आदि से सभी जीवो का भरण पोषण होता है।
* महाभारत युद्ध में बलराम ने सख्ती से यादवों को युद्ध में भाग लेने से मना कर दिया,फिर भी दुर्योधन यादव सेना मांग लिया,केवल सात्यकि विवशता जताता है,कृष्ण उसे अबाध्य कर देते है। कौरवों की पांडवों की अपेक्षा विशाल सेना थी ,उसके महारथी अजेय थे । बलराम कौरवों की जीत निश्चित समझ रहे थे ,व तीर्थ पर चले गए । जीवन के सभी भावों ( 12 सभी में 5)को लेकर हुए इस युद्ध में जीत अच्छाई की हुई । युद्ध जैसे एक तिनका पूरे जंगल को जला के राख कर देता है।
*अपने निजी अनुभवों को साझा करने वाले शिक्षक आज कल नहीं मिलते ।
*युद्ध बाद अर्जुन को फिर से गीता ज्ञान की चिंता सताने लगी जिस पर फिर एक बार दीर्घ चर्चा हुई । अतः कह सकते है, ज्ञान को आचरण में भी लाना चाहिए ,स्वयं के कर्मों में लीन होकर संदेह व संशय नहीं करना चाहिए ।
*शतरंज का खेल ठीक युद्ध की रणनीति है ।
*विज्ञान कहता है मेरी जरूरत है,वहीं प्रकृति कहती है मेरी जरूरत है। मशीनें जीवन का हिस्सा हो सकती है ,जीवन नहीं। आप किसे चयन करते है ? जहां प्रकृति वरदान है,तो विज्ञान अनुदान है ।
*ये परदेश और शहर एक जंगल है, यहां नाना प्रकार के तरह तरह के जीव विचरण करते है।
*रासायनिक दवाओं को समयावधि अनुसार फेकते बर्बाद होते और रिएक्शन होते जान पर बनते देखा है,परन्तु आयुर्वेदिक दवाओं को तो अभी तक नहीं देखा सुना।
*साथ समय बातों का नहीं विश्वासों का है।
*मित्रता की एक शर्त है, कि इसकी कोई शर्त नहीं है।
*यदि आप सीखने वाले है,धार और संपूर्णता चाहते है,तो एक काम को आपको दो बार से अधिक करना होगा।
*आविष्कार बहुत हो लेकिन मानवता के हित के लिए,निकोला टेस्ला उन्होंने मानवता हित पहले देखा । परमाणु बम के जनक अपने आविष्कार पर जिंदगी भर पछताए ।
*फेसबुक वीडियो अनुसार अगर चीन ने बांस व गन्ने के DNA gene को मिलाकर गन्ने की उन्नत किस्म बनाई है तो ऐसे अन्य एक दर्जन combination मेरे पास है। वैसे एक पेड़ में ग्राफ्टिंग तकनीक से अन्य प्रजाति को एक पेड़ पर उगाया जाता है ।वैसे फ्रूट सलाद ट्री का नाम मैने सुन रखा है। जिस पर same family फ्रूट होते है।
वैसे मानव स्वार्थ के लिए अमेजन के जंगल भी कम है।
*अखबार अनुसार जिस व्यक्ति ने दौलत शोहरत के लिए जिंदगी गुजारी उसी दौलत के बेड पर हार्ट अटैक से मौत हो गई फॉरेन से बेटे बेटी आये तो कंकाल मिला । उसी मानव कंकाल स्केलेटन को साइंस बायोलॉजी के क्लास में मुझे पढ़ाया बताया गया था।
*किसी भी क्षेत्र में निर्माण करना सीखो क्यों कि समय के साथ यह स्थायी है।
*भावनाए ,आशा है जैसे दिन होगा और आंसु जीवन है जैसे जल राहत है।
*जीवन और रास्ते में सदैव आगे की सोचनी चाहिए यही सफलता और मंजिल है।
*इनडोर पौधों को हफ्ते में एक बार धूप दिखा देना चाहिए।क्यों कि वो भी आपके लिए काम करते है,आपको शुद्ध हवा देते है,हवा की गुणवत्ता को बढ़ाते है। जिसके बिना आप 2-3 मिनट भी जिंदा नहीं रह सकते । जो फेफड़ों व जीवन के लिए प्राणवायु है। छोटे से देखने में भी कुछ खास सुंदर नहीं तुलसी की घर घर पूजा होती है। यहां तक देवताओं की तरह समानता और देव पूजा में समर्पित प्रसाद होती है।
हिंदू धर्म में कुछ पेड़ पौधो को काटना मना है। तो कुछ को छूना । अतः उनका ख्याल रखना है ,वो तुम्हारा ख्याल रखेंगे। पेड़ पौधों को रात में छूना भी मना है। अतः न छूने से ये तेजी से विकास करते है। ये मेरे अध्ययन से पता चला है।
एक पौधा छुई मुई को आप छू कर देख सकते है।
*लोग रासायनिक डियो परफ्यूम लगाते है,लेकिन प्रकृति की अरोमा थेरेपी को नकार देते है,तोते गिलहरियों व बदलते मौसम की मार से पके गिरे आम अमरूद अन्य फल फूल हवा के साथ ऐसी सुगंध बिखेरते है,जैसे बदलती ऋतुएं ।
अतः प्रकृति के फल फूल के डियो परफ्यूम सेंट सर्वोत्तम है।
*थोड़ा श्रम कीजिए पैदल चलिए पसीना बहाए समय पर ही संयमित व योग्य खाइए , नशा से दूरी रखे और प्रकृति के सानिध्य व घर को प्राथमिकता दे ये आयुर्वेद का सार है । और आयुर्वेद में मनुष्य की उम्र हेल्थी सौ साल है।
*जिस काले रंग को लोग ज्यादा पसंद नहीं करते वही काजल (सुरमा)औषधि के रूप में लोगों के आंखों में लगता है। और बच्चों को नजर से भी बचाता है।
*काला रंग अपने आप में विशेष है,कोई रंग इसकी विशेषता को प्रभावित नहीं कर सकता ।चाहे काले बादल हो काली आँखें हो काले बाल हो या काले फल । या चाहे काले दिल ही क्यों न हो।
*वाई फाई और हाई फाई में दोनों में एरिया की समस्या उत्पन्न होती है।
*ये मनुष्य जीवन है, यहां कामनाओं का अंत नही है,एक पूर्ण होगी तो दूसरी का जन्म होगा अतः संपूर्ण खुशी कभी नहीं मिल सकती ,उस पर भूख,प्यास,रोग,रोज आपको घुटने टेकने पर मजबूर करते है।अतः यहां कोई विजेता भी नहीं ,जिसने जीवन दिया है। उसका सम्मान और सामना करो पल और हवा दोनों नजरों के सामने ही रहती है। काली शक्तिया तुम्हे विचलित करेगी,तुम्हारा दायित्व है,अपने धर्म पर स्थिर रहो।
*यदि शोषण आप देख रहे है,तो अगला नंबर आपका आने वाला है।
*जिस दिन हम दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढ लेगे तो हमे कोई त्याग तपस्या की जरूरत नहीं पड़ेगी ।
*अगर आप की सोच मानसिकता ही छोटी है,तो आप बड़े से बड़े और छोटे से छोटे काम में आपको सफलता नहीं मिलेगी ।
भले वो तपस्या ही क्यों न हो वो सार्थक नहीं होगी।
*फेल पास असफल होना उतना मायने नहीं रखता ,जितना सीखने सुधारने की ललक और आत्मविश्वास का खोना ।
*यदि आपमें गुणवत्ता है,तो अधिकतर संगत मायने नहीं रखती क्यों कि हीरा कोयले के बीच भी चमकता है,और जल विशाल समुद्र में भी खारा ही रहता है । जो थोड़ी सी प्यास भी नहीं बुझा सकता। जरूरी नहीं कि संगत का ही असर हो ,एक बूंद भी सीप की संगत के बावजूद मोती ही बनती है।
*बड़ा होना और बड़कपन होना दोनों अलग अलग बाते है। छोटा व्यक्ति भी बड़ा दिल रख सकता है,परन्तु बड़ा व्यक्ति भी अपना स्वार्थ हित देखता है । दोनों खुश है ,परन्तु अपने अपने तरीके से।
*ये सोचने वाला विषय है,कि ईश्वर ने सिर्फ जीवन बनाया है ,चाहे वह पेड़ पौधों वनस्पतियों में ही क्यों न हो । बाकी बचा सब कुछ मनुष्य की देन है । यही मनुष्य की देन, झगड़ा फसाद मेरा तेरा अशांति युद्ध का कारण है।
*हमारे धर्म ग्रंथों में समता के अधिकार की बात कही गई है,और संविधान में भी मौलिक अधिकार की बात कही गई है। परन्तु मानसिकता और वर्चस्व की भावना अभी भी है। पेड़ पौधे भी ईश्वरीय देन है,मानव भी ईश्वर की रचना है।
आपस में प्रेम व सम्मान की भावना होनी चाहिए ,क्यों कि इस जीवन में व्यथित के स्थान पर तुम भी हो सकते हो।
*पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम भी रही है,और साथ ही साथ सूर्य की परिक्रमा भी कर रही है। जिससे दिन रात होते है,और वर्ष बनता है। ठीक उसी प्रकार हमें घर और समाज में दोनों जगह संतुलन बना कर कर्तव्य का एक समान निर्वहन करना चाहिए।
*देश की सरहदें होती है,घर की सरहदें होती है,रिश्तों की सरहदें होती है,परन्तु जब तक आचरण की सरहदें न हो सब व्यर्थ। सच्चे अर्थों में यदि आचरण अच्छाई न हो तो इन सरहदों का कोई औचित्य नहीं रह जाता ।
*मयूर तभी नाचता है,जब मेघ आते है,अर्थात बिना आशा के प्रत्याशा ठीक नहीं ।
*अपमान अवसर खोजता है।
*अधिकतर रिश्तों की परख एक गिलास पानी से हो जाती है।
*तर्क जीवन अर्क है।
*यदि आप बच्चे नहीं बन सकते तो उनसे आप हमेशा त्रस्त और परेशान रहेंगे ।
*सफलता असफलता पैरों के दोनों कदम के समान है,एक आगे होगा तो दूसरा पीछे जरूर होगा। दोनों जगह संतुलन और नियंत्रण आवश्यक है।
*जहां आस है,वही पास है।
*सपनों व पैसों पर ध्यान से अच्छा है,अपने ईमानदारी और काम पर ध्यान केंद्रित करो,यही सर्वोत्तम होगा।
*जलने सुलगने वाले इतना धुआं उत्पन्न कर लेते है,कि वो स्वयं अपना कुछ देख नहीं पाते।
*पैसा है तो कुछ नहीं लेकिन यह सोचने पर मजबूर कर देता है।
*जिस दिन आप दिल दिमाग दोनों को अस्वीकार कर देते है,आप का जीना न जीना एक बराबर है।
*मानवता का कोई धर्म नहीं होता,यदि कोई धर्म थोपता है,
तो वह मानव नहीं है।
*आज जो हम कर रहे है,कल वो हमे सूद ब्याज के साथ मिलेगा।
*संत महात्मा धर्मात्मा लोगो की उम्र जाति रंग रूप आदि नहीं देखा जाता ये हर जगह सम्मानित होते है,सच्चे महात्मा वे होते है, जिन्हें सम्मान अपमान की नहीं लोक कल्याण की भावना हो । वेद व्यास, अष्टावक्र, दुर्वासा ऋषि,सुकरात, सनत कुमार आदि उदाहरण है।
*मानव स्वार्थ व समय के साथ अनुकूल परिवर्तन न कर पाने से बहुत सी प्रजातिया विलुप्त हो गई अतः समय के साथ अपने आप को शारीरिक मानसिक सामाजिक बचाए रखने के लिए परिवर्तन बदलाव आवश्यक है,अब गिद्ध , गौरैया, जुगुनुवो की बारी है।
*हर कार्य का दिनों की तरह ज्ञान के साथ साथ सात (7) विकल्प भी रखो ,एक जगह स्थिर न रहो क्यों कि संसार में सूरज,चांद ,हवा,जल,मौसम,फल,फूल,फसलें कुछ भी स्थिर नहीं है।
*आज की मित्रता स्वार्थ की हो गई है,जिसमें तन मन धन तीनों शामिल है।
*भोजन भी उतना ही हो की अपच न हो,ठीक उसी प्रकार माँग और शुल्क उतना ही हो, कि भविष्य में तुम्हारी बेइज्जती बेशर्मी न हो,मूर्ख बनाने का धंधा ज्यादा चलता नहीं है।
*कालिया नाग के विष से यमुना का जल विषैला हो गया था,ठीक उसी प्रकार समाज में नाग रूपी बुरे लोगों से समाज में जहर व गंदगी फैल जाती है। ये विष वमन करते रहते है।
*लोगों के लिए समय बर्बाद करने से अच्छा है,अपनी तपिश ऐसा रखो कि लोगों को उसकी ऊष्मा स्वयं महसूस हो।
*आशा अभिलाषा की अधिकता उचित नहीं ,क्यों कि आपकी परछाई भी सदा आपके साथ नहीं रहती।
*समय और स्वीकृति की बात ये है कि एक ही बादल कभी जल बरसाता है ,तो कभी ओला के रूप में पत्थर। अतः समय किसी का नहीं है,विधि हाथ सब है।
*कभी कभी हमारे सोच विचार में दूसरों के साथ समानता होती है,ऐसा होना ये अच्छाई बुराई की सेना है।
*चींटी से लेकर हाथी तक सभी में एक ही प्राण ऊर्जा है।अतः अमीर गरीब,छोटा बड़ा का आंकलन कर कुकृत्य करने वाले दूषित आत्मा होते है। हमारे चारों वेदों व संविधान में समता की बात कही गयी है।
*ईमानदारी आपकी वह कमाई है,जिसे कोई भी देवता भी आपसे नहीं छीन सकते,ये हवा की तरह शीतल सुखद अहसास है,ये पुण्य है।
*अगर आपके दिल में शुद्धता सच्चाई प्रेम है,तो सही चयन ही ईद, क्रिसमस डे,बैसाखी, पर्यूषण पर्व,बुद्ध पूर्णिमा (बेसक) होली-दिवाली,गुरु पूर्णिमा है। अतः निभाने के लिए बहाने व समय न देखे।
*शब्दों की मर्यादा रखे,क्यों कि कही ये हमारे संस्कार को न प्रकट करने लगे। इसलिए हिन्दू धर्म में मर्यादा के भगवान श्री राम है।
*अच्छे लोग कही भी हो उनका प्रकाश हम तक पहुंचता जरूर है,सूरज चांद हमसे लाखों किलोमीटर दूर है परन्तु उनका उजाला आशीर्वाद स्वरूप मिलता है। पृथ्वी पर जीवन भी इन्हीं का अहम योगदान है।
*फल फूल अनाज को बनने पकने में समय लगता है,उसी प्रकार प्रतिभा को निखरने संवरने परिपूर्ण होने में समय लगता है,अतः इन्हें समय लेने देने में कोई अवरोध न उत्पन्न हो।
*ज्ञान अर्जन की महानता तभी है,जब आप इसे अग्रसारित करे।
*रास्ते सदैव मंजिल की तरफ ले जाते है,अतः जीवन पथ पर सदैव आगे की देखना चलना चाहिए।
*भले आप घनघोर अंधेरे जंगलों में हो रास्ता बताने के लिए एक किरण ही काफी है।
*दादा दादी घर पर बोझ नहीं है,स्वभाव अनुसार बच्चों को निचोड़ दिखा सीखा के जाते है।
*ऋतुओं को हम कोस नहीं सकते क्यों कि उनका आस्तित्व ही एक दूसरे से है। अतः जीवन में परिवर्तन हो तो घबराए नहीं,ये जीवन की परिस्थितिया जो सिखाती दिखाती है।
*यदि आप जीवन में आशा नहीं रखते तो आप जीवित व्यक्ति नहीं है।क्यों कि आशा से निराशा भी है जिज्ञासा भी है ,जीवन पथ से प्यासा भी है।
*यदि आप किसी दुकान पे जाते है,तो सबसे पहले साफ सफाई देखे क्यों कि हेल्थ इस वेल्थ हायजेनिक ही हेल्थी है।
*माना बुराई ज्यादा है, परन्तु अच्छाई भी हर जगह है,चाहे वह गटर साफ करने वाला ही क्यों न हो वहा भी अच्छाई है।
*यहां कोई राजा नहीं सभी रंक है,पृथ्वी पर सभी मुसाफिर है। बस आज हमारा स्थान कल कोई और ले लेगा।
*वसूल को आप हल्के में मत लीजिएगा क्यों कि जितना यह जरूरी है,उतना ही कारगर भी । वसूल ही है,जिससे पैसे वसूल हो जाते है।
*मार्केटिंग का सीधा सा फंडा है,आप नहीं आपके प्रोडक्ट बोले।
*बलराज साहनी की फिल्म दो बीघा जमीन को आए एक पीढ़ी बीत चुकी है,बहुत से परिवर्तन हुए है,परन्तु मानवता संवेदनाओं आदि का नजरिया आज भी वही है।
*संधि संदेश लेकर गए कृष्ण को दुर्योधन अस्वीकार कर देता है । अपने आथित्य का प्रस्ताव देता है,कृष्ण के अस्वीकार पर दुर्योधन कृष्ण को बंदी बना जुबान खींच लेने को कहता है। इस पर कृष्ण उसे कहते है,दुर्योधन, होगा वही जो तुम चाहते हो ये मेरा वचन और मेरा वरदान दोनों है। जिसे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह की कालजयी कविता रश्मिरथी खंडकाव्य से कृष्ण की चेतावनी में भव्य रूप से प्रस्तुत किया गया है ।
*तुम मुझे ठुकरा सकते हो मेरे प्रेम को ठुकरा सकते हो मुझे नीचा भी दिखा सकते हो मुझसे नफरत और नफरत के बीज भी बो सकते हो मेरे लिए तरह तरह की धारणा भी बना सकते हो, मेरा कोई अंत नहीं है ,मै अनंत हु ,मै अच्छाई हु,मै ब्रह्मांड हु ,मै तुममें हु ,तुम्हारी हर सांस में हु,सृष्टि के आदि और अंत तक हु ,अनंत हु,क्यों कि मै अच्छाई हु । समस्याओं का सामना ही मेरी परख है । सूरज रोज उगता है , रोज अस्त होता है । ये अच्छाई की परिभाषा है ,और अच्छाई हर जगह है।
*स्टीविया के पत्ते चीनी से 200-300 गुना ज्यादा मीठा है। परन्तु ये चीनी नहीं है । आप इसे शुगर में भी ले सकते है ।(मिठास की जरूरत और शुगर में योग्य बताया जा रहा है और है भी ) अब आप ही बताओ कोई विज्ञान क्या प्रकृति को चुनौती दे सकता है। प्रकृति ही विज्ञान की चरमता है।
*अधिकतर भगवान और बच्चों का कोई समय नहीं होता।
*धारणाओं को कोई रोक नहीं सकता क्यों कि ये मनुष्य का स्वतंत्र अधिकार भी है।
* अधिकतर आंतरिक खुशियां हम खरीद नहीं सकते दुख बेच नहीं सकते नियति हमारे हाथ है नहीं अतः प्रेम और नेकी का रास्ता चुनो।
*धन अर्जित करते समय लोगों को मैने देखा है,वो उसमें इतना डूब जाते है,कि धन उनकी आत्मा में समा जाता है,और उसी धन के लिए वो अपनी आत्मा तक को बेच देते है । धन सब कुछ नहीं है, पहले भी नैतिक मूल्य धन से ऊपर था और शायद आज भी है।
* जिन रास्तों से अनभिज्ञ हो,चलना उसी पर है, उसके लिए लोगों से प्रार्थना और जानकारी लेने में क्या हर्ज है। नम्रता विनम्रता अभिमान है,अपमान नहीं ।
*स्थाई रहने पर अहमियत रहती है,जैसे वृक्षों की।
*मर्यादा की भी लकीर होती जिसे त्रेतायुग में लक्ष्मण रेखा के नाम से आज भी जाना जाता है। जिसमें आदर्श मंत्र और शक्ति तीनों समाहित रहती है।
*पहले ऋषि मुनियों को सोच समझ बहुत बड़ी व महान थी,भले आज उन्नत विज्ञान है,लेकिन आज लोगों की सोच समझ बहुत छोटी और तुच्छ है। आज भले हर जगह मशीनें है जमाना यांत्रिक है । परन्तु एक ब्रह्मास्त्र दुनिया का अंत करने के लिए काफी था ,जो आज भी समझ से परे है। बड़े लोगों का दिल छोटा है या छोटे लोगों का दिल बड़ा ?। आज का समय समाज से वास्तव में दूर रहने का हो गया है।
*एक पक्षी के लिए असीमित आकाश पड़ा हुआ है,लेकिन उसे सुख चैन एक टहनी और छोटे से घोंसले में ही मिलता है ।अतः आजादी का तात्पर्य यह नहीं कि हम उचित अनुचित का फर्क भूल जाये,अतः कह सकते है मेरा तेरा उचित अनुचित गलत होने वाले व्यक्ति पक्षियों से छोटे है।
*भारतीय घरों में महाभारत की तरह दो भागों में सेनाएं विभक्त ही जाती है,मम्मी पापा की सेना तो आगे जाके बुआ भाभी की सेना । भारत सरकार द्वारा HUF लॉ भी है।
*हर कोई अपने पेशे में काबिलियत रखता है,एक माली बॉटनी और हॉर्टिकल्चर के छात्र को जानकारी दे सकता है। एक ताला चाभी बनाने वाला इंजिनियर के छात्र को बता सकता है। अंग्रेजी देशों से आया हुआ एक प्लंबर भी यदि अंग्रेजी में भाषण दे दे तो तालियों व फूलो के हार से उसका स्वागत हो जाएगा । ये भारत है ,एक से एक कारीगर यहां है,ताजमहल बनाने वाले कौन से आर्किटेक्ट पढ़े थे,जो आज भी विश्व में विख्यात है।
*कई देशों में जनसंख्या इतनी कम है, वहा के देश सरकार लोगों को तरह तरह से जनसंख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है । भारत की जनसंख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। फिर भी यहां संतान प्राप्ति की चाहत में निसंतान दंपति लोलार्क कुंड वाराणसी लोलार्क छठी के दिन 10 सो किलोमीटर तक की लाइन लगती है, हुजूम देखकर लगता है ,पूरा शहर ही निसंतान । हिंदू धर्म सबसे प्राचीन धर्म है, यहां संतान प्राप्ति के लिए देवता तक शिव की तपस्या करते है । व धर्म ग्रंथों में दर्जनों उदाहरण है। जिसमें महाभारत के पांडु से लेकर रामायण के दशरथ तक है। अन्य तमाम कहानियां भी है। जरत्कारु की भी कहानी आती है। यहां स्त्री को लक्ष्मी,सरस्वती, व दुर्गा काली के रूप में वर्गीकृत किया गया है। जो क्रमश धन, ज्ञान,शक्ति की देवी है। वाराणसी के इसी कुंड पर सूर्य देव ने तपस्या किया था ,लोलार्केश्वर महादेव स्थापित हुए थे । एक मान्यता है सूर्य के रथ का पहिया गिरने से इस कुंड का निर्माण हुआ था । इस कुंड के जल को चमत्कारी माना जाता है।
*मानव फितरत के आगे साँप बिच्छू भी फीके है,भले ही आप कितने भी स्वच्छ क्रिस्टल क्लियर रहे।
*ज्ञान और शब्द एक दूसरे के पूरक है,कभी कभी इनकी कीमत अमूल्य हो सकती है। जैसे मंत्र शाप और वरदान ।
*अधिकतर हम जो सोच रखते है, हममें आत्मा में उतर कर स्थापित हो जाती है,वही आचरण करने लगती है।अतः स्वक्ष शुद्ध अच्छी सोच रखो ।
*नकारात्मक आसुरी शक्तियां स्थाई नहीं होती,ग्रहण व बादलों से सूर्य की चमक थोड़ी देर ही प्रभावित होती है।
*आपका सारा काम या संपूर्णता लेकर दुनिया की कोई मशीन नहीं कर सकती। भविष्य में मशीने शायद मनुष्य के बराबर हो सकती है,परन्तु बढ़कर नहीं।
*अति आचरण का फल जरूर मिलता है। मानव होने का तात्पर्य यह नहीं कि जूतों से कीट पतंगों को मसल दो,सजग उन्माद का फल भुगतना होगा।
*बाल्यावस्था में मै जब सीनियर लोगों को टशन में गुटका आदि खाते देखता तो ,मै सोचता मुझे भी खाना है,बाद में ट्राई किया तो दाने व एलर्जी हो गई ,फिर सोचा पान मसाला ट्राई करूं फिर वही हाल अतः ये सब चीजें हितकर नहीं है। पान सुपारी जर्दा भांग शराब ताड़ी आदि ये सब दवा के रूप में प्रकृति ने दिया है । पर हमने इसे पैसे स्वार्थ आदि के लिए व्यवसाय बना लिया, लोग इसके लती हो जाएंगे तो व्यवसाय चलता रहेगा। एक फिल्म संजू बायोग्राफी इसका जीता जागता प्रमाण है। कुछ लोग पगले आजम भी बोल देते है। अच्छाई के नजरिए से दवा है,पर विकृत मानसिकता से लोग इसे नशे के तौर पर अच्छा देखते है । ये उचित नहीं है,समय जीवन दलदल में फंसने जैसा है।
*कार्य के प्रति समर्पण से ज्यादा आवश्यक है ,ईमानदारी और निष्ठा।
*वनस्पतियां यदि आप के जानवर खाते है,तो उससे दवा बनाई जा सकती है। यदि नहीं खाते तो उससे केवल बाहरी दवा बनाई जाती है।
*पाक कला भी एक विज्ञान है,इसमें भी पसंद और नापसंद की बात है । फिर भी प्रकृति और पौष्टिकता इसका सार है।
जैसे विटामिन सी गर्म करने पर गुणवत्ता स्वाद नष्ट हो जाता है। इसलिए इसे शरबत पानी या ठंडे भोज्य में शामिल करना श्रेष्ठ रहता है ।
*जिन पेड़ पौधों वनस्पतियों के रंग रूप स्वाद गुण आदि मिलते है,उनको merge करके बेहतर और नई किस्म बनाई जा सकती है।
*सज्जनता दौलत और अभिमान की विषयवस्तु नही है। यह सुविचार और भावनाओं से उत्पन्न होती है।
ये प्रश्न सदा रहेगा कि अंधेरे से उजाला हुआ या उजाले से अंधेरा।...............next part....
लेखक ;-विचारक ___रविकान्त यादव ......
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